इंसानियत

                                       इंसान का सबसे बड़ा धर्म “इंसानियत” हो तो क्या हो.......???
             
            हम सभी ने सुना है के “सब का मालिक एक है”.पर इस बात को मानता कोई नहीं. आपने भी सुना होगा की दुनिया में धर्म अब सिर्फ एक व्यापर ही बन कर रह गया है,कोई धर्म के नाम पर राजनीति  कर रहा है तो कोई व्यापार. हिंदुस्तान में रहने वाले हर नागरिक का एक अलग धर्म हे,एक अलग जाती है, कोई ऊंची जाति का है तो कोई नीची. पहले सिर्फ धर्म में बटे हुवे थे लोग, अब जातियों में भी बट चुके है.
     
            मुझे पता है आप लोग ये बाते पढ़ कर पक रहे है, क्यों के आप सभी इन सारी बातों से परिचित होंगे,हम सभी ने हर किसी के मुँह से ये सुना होगा के में हिन्दू हु,में मुस्लिम हो, में शिख हो या क्रिस्चियन हु,पर बहुत ही कम लोग होते है जो बोलते है में हिंदुस्तानी हूँ . इंसान का सबसे बड़ा धर्म “इंसानियत” हो तो क्या हो?
       
            इंसानियत का कोई धर्म नहीं है, वो हर धर्म के इंसान में मौजूद होती है. बस कोई उसे अपने अंदर झांक कर नहीं देखता.और हां में ये भी नहीं बोल रहा कि आप लोग अपना धर्म छोड़ कर इंसानियत को अपना धर्म बना लो,इंसानियत कोई धर्म नहीं पर अगर इंसान इंसानियत की राह पर चलदे तो शायद इस संसार से धर्मवाद, जातिवाद,आतंकवाद, भ्रष्टाचार और आपसी झगडे कम हो जाए.
         
           में आप सभी को मेरी ज़िन्दगी का एक घटना बताना चाहूंगा जो हालही में होली के त्यौहार पर मेरे साथ हुवा,मुझे पता है आप यह पढ़ कर बोर नहीं होंगे, पहले तो में अपना परिचय करवाना चाहुंगा,मेरा नाम कादिर सलिम है में कॉल सेंटर में जॉब करता हूँ , 20/03/2019 को होली दहन का दिन था और में रोज़ाना की तरह ऑटो रिक्शा से ऑफिस जा रहा था,ऑटो स्टेंड से ऑफिस बिल्डिंग जाते वक्त मुझे किसीका बटवा मिला, मुझे ऑफिस के लिए देरी हो रही थी तो वो बटवा में अपने साथ ही लेकर चला गया,मेने टी ब्रेक में उस बटवे को खोल कर देखा तो उसमे ड्राइविंग लइसेंस, पैन कार्ड, क्रेडिट कार्ड, बैंक एटीएम और कुछ नकद रुपये रखे हुवे थे,जो हर इंसान आम तोर पर अपने बटुए में रखता ही है आप सभी को पता होगा. में ऑफिस से निकल ते ही पैन कार्ड पर दिए हुवे एड्रेस पर पोहोच गया जो की मेरे ऑफिस बिल्डिंग से काफी नज़दीक था, में वहा पोहचा तब होली दहन की तैयारी चल रही थी घर के सभी लोग होली दहन की पूजा के लिए उत्साहित थे, मेने वहा खड़े एक आंटी को पूरा हादसा बताया की मुझे ये बटवा रास्ते में पड़ा हुआ मिला, आंटी ने वो बटवा देखा और  “दो मिनट यहाँ खड़े रहो” बोलकर बिना बटवा लिए ही घर में चले गए, में वहा खड़ा इंतज़ार ही कर रहा था की  8 से 10 लोग मेरी तरफ आते हुवे दिखाई दिए, कुछ पल के लिए तो में गभरा ही गया था कि ये लोग मुझे चोर समझ कर पिट ना दे, पर खैर ऐसा नहीं हुवा , जिन भाई साहब का बटवा था उन्हों ने आते ही मुझे खुशी के मारे गले लगा लिया और मेरा शुक्रिया अदा किया,
           
                  मुझे उन्होंने घर में बुलाया खूब सारे पकवान और मिठाई खिलाई, में फिर भी हैरान था क्यों के “उनके घर में जीजस क्राइस्ट की मूर्ति वाला फोटो औरक्रॉस लगा हुवा था और वो होली सेलिब्रेट कर रहे थे, “मैंने आश्चर्य से पूछा के आप क्रिस्चियन हो?” मेरा यह सवाल सुनकर वो मुस्कुरा कर बोले नहीं हम “हिंदुस्तानी” है. यह सुन कर में कुछ पल के लिए दंग रह गया था, फिर मैंने मुस्कुरा कर कहा चलो पूजा स्टार्ट हो रही है. फिर उन्होंने मुझसे पूछा के “आप हिन्दू हो बेटा”, तब मेने भी गर्व से मुस्कुराते हुवे बोलै के नहीं में भी “ह्न्दुस्तनि” हु.
             मुझे हैरानी इस बात की नहीं थी कि उन्होंने मुझे पीटा नहीं बल्कि इस बात की थी के वो 'क्रिस्चियन' थे. मेने उन्हें बटवा लोटाया वो मेरी “इंसानियत” थी, और उन्होंने मेरी खातिरदारी की वो उनकी “इंसानियत थी., बटवा लेते वक्त जो उनके चेहरे पर मुस्कराहट थी वो “इंसानियत” का प्रतीक था और वो जो होली की तैयारी चल रही थी शायद वो भी उनकी “इंसानियत” थी..,
           
                कितना अच्छा होता के हिंदुस्तान का हर नागरिक हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई की जगह इंसानियत के नाते “हिंदुस्तानी” कहे,ईद हो या दीवाली लोधी हो या क्रिसमस डे सब मिल कर इंसानियत के नाते सेलेब्रेट करे,
             कितना अच्छा होगा कि अयोध्या में राम जन्म भूमि जैसी पवित्र जगह पर मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारा और चर्च बने ताकी हिंदुस्तान का कोई भी नागरिक उस पवित्र भूमि पर पैर रखे तो उसे अपना खुदा मिल जाए, और राजनीति करने वालों को शायद और कोई बहाना मिल जाए, और ये सब तब ही सक्य  होगा जब हिंदुस्तान का हर नागरिक अपनी इंसानियत को जगाएगा, क्यों की इंसानियत ही धर्म और एक्ता का प्रतीक है.
                                                           
                                                 “आओ  एक नया भारत वर्ष रचते है
                    जहां इंसानियत को धर्म और एक्ता का प्रतीक रखते है”
                                          “सारी दुनिया देखेगी इस एकत्रित भारत को
                                  जहा 129 धर्मो को निभाने वाले इंसान बसते है”
                                                                 
                                                                                                         - Kadir salim

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